वैशेशिक दर्शन

User Rating: 0 / 5

Star InactiveStar InactiveStar InactiveStar InactiveStar Inactive
 
Loading...


वैशेषिक हिन्दुओं के षडदर्शनों में से एक दर्शन है। इसके मूल प्रवर्तक ऋषि कणाद हैं (ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी)। यह दर्शन न्याय दर्शन से बहुत साम्य रखता है किन्तु वास्तव में यह एक स्वतंत्र भौतिक विज्ञानवादी दर्शन है।

इस प्रकार के आत्मदर्शन के विचारों का सबसे पहले महर्षि कणाद ने सूत्र रूप में लिखा। कणाद एक ऋषि थे। ये "उच्छवृत्ति" थे और धान्य के कणों का संग्रह कर उसी को खाकर तपस्या करते थे। इसी लिए इन्हें "कणाद" या "कणभुक्" कहते थे। किसी का कहना है कि कण अर्थात् परमाणु तत्व का सूक्ष्म विचार इन्होंने किया है, इसलिए इन्हें "कणाद" कहते हैं। किसी का मत है कि दिन भर ये समाधि में रहते थे और रात्रि को कणों का संग्रह करते थे। यह वृत्ति "उल्लू" पक्षी की है। किस का कहना है कि इनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ईश्वर ने उलूक पक्षी के रूप में इन्हें शास्त्र का उपदेश दिया। इन्हीं कारणों से यह दर्शन "औलूक्य", "काणाद", "वैशेषिक" या "पाशुपत" दर्शन के नामों से प्रसिद्ध है।

पठन-पाठन में विशेष प्रचलित न होने के कारण वैशेषिक सूत्रों में अनेक पाठभेद हैं तथा 'त्रुटियाँ' भी पर्याप्त हैं। मीमांसासूत्रों की तरह इसके कुछ सूत्रों में पुनरुक्तियाँ हैं - जैसे "सामान्यविशेषाभावेच" (4 बार) "सामान्यतोदृष्टाच्चा विशेष:" (2 बार), "तत्त्वं भावेन" (4 बार), "द्रव्यत्वनित्यत्वे वायुना व्यख्याते" (3 बार), "संदिग्धस्तूपचार:" (2 बार)। 

Arya Samaj - Vaisheshik Darshan by Pandit Rajaram - [Sanskrit-Hindi].pdf


Year 1919
Pages 165
Language Sanskrit, Hindi
Book contributor Sabyasachi Mishra
Collection opensource

देववाणी एंड्रायड एप डाउनलोड

वार्ताः


संघ शाखा लगाने की पद्धति...

🙏गुरु पुर्णिमा महोत्सव🙏
२७/०७/२०१८/- शुक्रवार
------------------------------- [ ... ]

अधिकम् पठतु
महाभारत के युद्ध में भोजन प्रबंधन...

*🔥।। महाभारत के युद्ध में भोजन प्रबंधन।।🔥*

*महाभारत को हम  [ ... ]

अधिकम् पठतु
राम रक्षा स्त्रोत को पढकर रह सकते हैं भयमुक्त...

राम रक्षा स्त्रोत को ग्यारह बार एक बार में पढ़ लिया जाए तो  [ ... ]

अधिकम् पठतु
आज से हमारे त्योहार शुरू हो गए एवं शादी ब्याह जैसे...

आज से हमारे पर्व एवं त्योहार शुरु हो गए हैं.. जरा नोट 📝 कर ल [ ... ]

अधिकम् पठतु
चंद्रग्रहण जुलाई २०१८ आषाढ १५...

🌕🌖🌗🌘🌑

*चंद्र ग्रहण*
27-28 जुलाई 2018 आषाढ़ पूर्णिमा ( *गुरु पूर् [ ... ]

अधिकम् पठतु
भारत की दुर्दशा.और आरक्षण का जड ...

भारत की दुर्दशा.और आरक्षण का जड



खुशनुमा आर्यावर्त. ..सोने  [ ... ]

अधिकम् पठतु
राजा जनक के गुरू अष्टावक्र...

महाराजा जनक के गुरु अष्टावक्र जी एक सम्पूर्ण प्रस्तुति,,,,
 [ ... ]

अधिकम् पठतु
श्वेतार्क गणपति पूजन विधान...

श्वेतार्क गणपति पूजन विधान
〰️〰️🔸〰️🔸〰️🔸〰️〰️
गणेश प्रतिम [ ... ]

अधिकम् पठतु
११५ ऋषियों के नाम,जो कि हमारा गोत्र भी है...* ...

*११५ ऋषियों के नाम,जो कि हमारा गोत्र भी है...* =================================== च [ ... ]

अधिकम् पठतु
आपकी राशि के अनुसार शिव अर्चना...

आपकी राशि और शिव पूजा शिव पुराण में उल्लेख हैं की महाशिवर [ ... ]

अधिकम् पठतु
बुद्ध और ब्राम्हण

बुद्ध और ब्राह्मण मूलनिवासी अकसर ब्राह्मणों को कोसते है [ ... ]

अधिकम् पठतु
सोमवार के ही दिन शिव की पूजा क्यों करते हैं जानें ...

🌿🌸🍃🌺🌿🌸🍃🌺🌿🌸🍃 *क्यों सोमवार" को ही *भगवान शिव की पूजा कर [ ... ]

अधिकम् पठतु
जानें महाशिवरात्री का वैज्ञानिक पहलू एवं छ्मा मंत्...

💐✍💐 *जानें महाशिवरात्रि का वैज्ञानिक पहलू और क्षमा मन्त [ ... ]

अधिकम् पठतु
रावण पराजय और सीता हरण क्यों...

*“ रावण - पराजय और सीता - हरण क्यों ?
“* नारायण ! श्रीमद् देवीभ [ ... ]

अधिकम् पठतु
महाशिवरात्री व्रत कथा...

महा देव औरशिवरात्रि जप तप ब्रतकी कथा पूर्व काल में चित्रभ [ ... ]

अधिकम् पठतु
अन्य लेख