श्लोक संग्रह १

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॥ श्लोक संग्रह १ ॥ 
॥ श्लोक संग्रह १ ॥

                     ॐ
वक्रतुंड महाकाय कोटिसूर्यसमप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

    या कुन्देन्दु तुषार् हार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता ।
    या वीणावरदंड मंडितकरा या श्वेतपद्मासना ।
    या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभ्रुतिभिर्देवै सदा वंदिता ।
    सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेष जाड्या पहा ॥

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः ।
गुरुः साक्षात्परब्रह्म तस्मै श्री गुरवेनमः ॥

    कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती ।
    करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनं ॥

समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डले ।
विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे ॥

    शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं ।
    विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गं ।
    लक्ष्मीकांतं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं ।
    वंदे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥

सर्वेऽपि सुखिनः सन्तु सर्वे सन्तु निरामयाः ।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित्दुःखभाग्भवेत् ॥

    या देवी सर्वभूतेषु मातृरुपेण संस्थितः ।
    या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरुपेण संस्थितः ।
    या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरुपेण संस्थितः ।
    नमस्तस्यैः नमस्तस्यैः नमस्तस्यैः नमो नमः ॥

ॐ णमो अरिहंताणं
ॐ णमो सिद्धाणं
ॐ णमो आयरियाणं
ॐ णमो उवज्झायाणं
ॐ णमो लोए सव्वसाहुणं
          एसो पंच णमोकारो
          सव्व पावपणासणो
          मंगलाणं च सव्वेसिम्
          पढमं हवई मंगलं
सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते ॥

    वसुदेव सुतं देवं कंस चाणूरमर्दनं ।
    देवकी परमानंदं कृष्णं वंदे जगद्गुरुं ॥

ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविः ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम् ।
ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना ॥

    राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।
    सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥

शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धनसम्पदा ।
शत्रुबुध्दिविनाशाय दीपज्योति नमोऽस्तुते ॥

    कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन ।
    मा कर्मफलहेतुर्भिः मा ते सङ्गोस्त्व कर्मणि ॥

करचरण कृतं वाक्कायजं कर्मजं वा ।
श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधं ।
विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व ।
जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो ॥

    ॐ सह नाववतु । सह नौभुनक्तु ।
    सह वीर्यं करवावहै ।
    तेजस्वि नावधीतमस्तु । मा विद्विषावहै ॥

त्वमेव माता च पिता त्वमेव ।
त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव ।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव ।
त्वमेव सर्वं मम देवदेव ॥

    ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय ।
    मृत्योर्मा अमृतं गमय ॥

    ॐ शांतिः शांतिः शांतिः ॥

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते ।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥

     ॐ शांतिः शांतिः शांतिः ॥




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