प्रस्तावना

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 देववाणी विकास समूह रीवा म.प्र.

 

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हमारे समूह में आप भी जुडकर देववाणी व देश का समुचित विकास व विश्वगुरू के लोकोक्ती सत्य कर अपना ज्ञान संसार में बांट कर आप गुरू व भारत को विश्व गुरू बनाने में सहयोग करे हम आपकी विद्या को सादर सम्मान के साथ जन-जन तक पहुचानें में मद्द करेंगें ।आप अपना कोई भी लेख ई-मेल द्वारा ही भेजिये व  आपकी इच्छानुसार आप अपनी फोटो व पूरा पता भेजकर अपना नाम भी प्रकाशित करवा सकते है ।

यह बेबसाइट संस्कृत भाषा के संगणकीय विकास हेतु बनाई गई है इसका नामकरण देववाणी इसीलिये रखा गया है

नोट- शिर्फ हिंदी और संस्कृत  दस्तावेज ही मान्य होंगे व किसी भी गैरकानूनी कंटेट रखवाने पर आप पर कार्यवाही की जा सकती है ।इसके लिये हम व हमारा ग्रुप जिम्मेदार नही होगा अतः आपसे विनम्र निवेदन है की इस बात को ध्यान में रखें । ज्यादा जानकारी के लिये यंहा पढें।Image descriptionProfessional Help

यदि आप अपनी विडियो व संस्कृत किताब हमारे माध्यम से इस साइट पर बेचना चाहते होतो संपर्क करे १ साल तक बिना किसी शुल्क के ये सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी और आपका दस्तावेज पूरी संभावित सुरक्षा के साथ यंहा रखी जायेगी ।

यह वेबसाइट १३ अगस्त २०१३ से पहले ८ नवंबर २०१२ में www.vindhyanchal.in के एक खंड के रूप में विकसित की गई थी बाद में इसको अधिकारिक रूप से www.devwani.in पर हास्टगाटर कंपनी की मद्द से प्रकाशित किया गया बाद में ये साल २०१४ में इसे ये प्रारूप devwani.org पर मिला।

कुछ पुरानी यादें
  
मेरी वेबसाइट vindhyanchal.in पर पहला संस्कृत लेख १३ अगस्त २०१२ को माता विंध्यवासिनी पर लिखा गया श्लोक और व्याख्या था बाद मे १४ अगस्त २०१२ को स्वतंत्रता दिवस पर लिखा गया था। तब ये पहली संस्कृत खंड इस वेबसाइट के संस्कृत संस्करण में बनाया गया था।और अगस्त २०१३ में देववाणी नाम से अधिकारिक नाम पर पब्लिश किया गया तब ये दुनिया की पहली संस्कृत वेबसाइट थी जो देवनागरी में लिखी गई थी और आज पहली ऐसी वेबसाइट है जो सभी वेद पुराण पढने और डाउनलोड करने की सुविधा देवनागरी लिपि में दे रही है।
हमारी वेबसाइट के ५ माह  बाद पहला संस्कृत विकीपीडिया लेख दिनांक  को ०४:५४, २१ जनवरी २०१३‎ Suchetaav द्वारा लिखा गया था जो कानपुर शहर पर था।

 

देववाणी एंड्रायड एप डाउनलोड

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